मुम्बई के बीचों बीच यह किसी बड़े शहर के बराबर है।
कॉरोना वायरस के कारण गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।
घनी आबादी के कारण पॉजिटिव मरीजों की संख्या
बढ़ती जा रही है।यही रफ्तार रहा तो विकट समस्या होने वाली है।
वर्तमान की सरकार,पुलिस,प्रशासन का प्रयास तो हो रहा है पर सबसे बड़ी समस्या नासमझी के साथ ही साथ घनी आवादी है।सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो रहा है।
रतन टाटा ने आज यह सवाल खड़ा किया है कि बड़े बड़े
बिल्डिंग्स तो बने मुंबई में पर स्लम को क्यों लगातार विकसित होने दिया?
कोरोना समस्या ने धारावी में बेसिक सुविधाओं का अभाव,गंदगी का पोल खोलकर रख दिया है।
इसके लिए सरकारें तथा बिल्डर्स ज़िम्मेदार है।
बिल्डरों ने शिर्फ़ अपने फायदे का सोंचा।धारावी के विकास के लिए कुछ नहीं किया।
यही हाल देश के बड़े शहरों दिल्ली,नोएडा,कोलकाता,चेन्नई,हैदराबाद आदि शहरों की हो रही है।शहरों के विकास के प्लान में समाज में रोजमर्रा के कामों में लगे दाई, नौकर,ड्राइवर,नाई,दर्जी,कारपेंटर,धोबी,छोटे दुकानदार,सब्जी ठेला,रिक्शा वाले,सभी तरह के मिस्त्री आदि के रहने के लिए क्यों नहीं सोचा जाता?
इनके बिना समाज का काम भी नहीं चलता।योजनाबद्ध तरीके से इनके लिए भी बहुमंजिलें सस्ते छोटे फ्लैट्स बनाएं जा सकते हैं।कुछ काम मुंबई में हुआ भी है पर वह पर्याप्त नहीं हैं।
फिलहाल धारावी में पक्के मकान,फ्लैट्स बनें इसकी चर्चा यहां कर रहा हूं।बड़ा काम है।पर समस्या भी विकराल है।नर्क की ज़िन्दगी ज़ीने को मजबूर है जनता।
कॉरॉना से मुक्ति के बाद इस स्लम को योजनाबद्ध तरीके से बहुमंज़िले भवन का निर्माण सरकार नागरिकों की सहमति से करें।समस्या का समाधान हो ताकि बेसिक ज़रूरी सुविधाओं से युक्त धारावी विकसित हो।बिल्डर्स नाजायज लाभ लेने का प्रयास ना करें।गरीबों को राहत दें।सुखद,स्वस्थ जीवन जीने का हक मुहैया कराएं।
No comments:
Post a Comment